Oct 5, 2012

किश्तों में ही सही

अब ना तो वो पूरा कहते हैं
अब ना ही हम पूरा सुनते हैं
खैर बात तो होती है
चाहे किश्तों में ही सही

वो ज़रा सा देख लेते हैं
हम थोड़ा झांक लेते है
खैरं मुलाक़ात तो होती है
चाहे किश्तों में ही सही
हम तकिया फेंक देते हैं
वो चद्दर खींच लेते हैं
खैर पूरी रात तो होती है
चाहे किश्तों में ही सही

हम छतरी तान देते है
वो थोड़ा भीग जाते हैं
खैर बरसात तो होती है
चाहे किश्तों में ही सही

वो थोड़ा रो भी लेते हैं
हम थोड़ा हंस भी देते हैं
जिंदगी साथ तो होती है
चाहे किश्तों में ही सही..
-दामोदर व्यास
4, अक्टूबर 2012, 2AM
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